जो होता है, वह भी अच्छा होता है!
अतीत के अंधेरे धुसर रंगो में, और एक वृक्ष की छाल में मेरा कुछ आकृतियों को देखने का प्रयास है  जो हर रोज़ एक किताब खोलती है। इसमें कई कहनियो के किरदार सामने आते हैं,और ये मेरे साथ घंटो बातें करते है। इनके गलियारे तंग और सकरे है लेकिन सहद इन्ही में रसता है। कहानी किसी की भी हो भावो का मेला तो लगता ही है।
यूं तो वर्तमान से अतीत मे जाना आसान है लेकिन अतीत की सिख वर्तमान के हाथो मे एक नई ईट भविष्य के लिए देती है।

आनन्द प्रकाश

सभी कार्य:- "शीर्षकहीन", कैनवास पर ऐक्रेलिक, 11 X 22 सैनटिमिटर , 2017 ।












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